गढ़ बड़ली में गूंजा वीर राव चंद्रसेन का शौर्य, 485वीं जयंती और गढ़ की 350वीं वर्षगांठ पर भव्य आयोजन
हिजहाईनेश महाराजा गज सिंह जोधपुर ने भेजी शुभकामनाएं, बोले—अमर विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना गौरव की बात
भिनाय (अजमेर)। मारवाड़ के वीर शिरोमणि राव चंद्रसेन जी की 485वीं जयंती एवं ऐतिहासिक गढ़ बड़ली की 350वीं वर्षगांठ के अवसर पर अजमेर जिले के गढ़ बड़ली में राव चंद्रसेन जयंती स्मृति न्यास, बांदनवाड़ा के तत्वावधान में भव्य एवं गरिमामय समारोह आयोजित किया गया। समारोह में क्षत्रिय समाज सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु, गणमान्य नागरिक एवं राव चंद्रसेन जी के अनुयायी शामिल हुए।
पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे समाजबंधुओं ने वीर शिरोमणि राव चंद्रसेन जी को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए उनके शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और त्याग को याद किया। कार्यक्रम में राव चंद्रसेन जी की वीरगाथा और उनके जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।
समारोह के दौरान जोधपुर दरबार हिजहाईनेश महाराजा गज सिंह जी जोधपुर की ओर से भेजा गया महत्वपूर्ण पत्र भी पढ़कर सुनाया गया। पत्र में समारोह के आमंत्रण के लिए आभार व्यक्त करते हुए पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों एवं प्रतिबद्धताओं के कारण व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पाने की बात कही गई। साथ ही राव चंद्रसेन जयंती एवं गढ़ बड़ली की 350वीं वर्षगांठ पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए आयोजन की सफलता की कामना की गई।
पत्र में उम्मीद जताई गई कि यह आयोजन राव चंद्रसेन जी की अमर विरासत और गढ़ बड़ली की गौरवशाली ऐतिहासिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह रहे, जबकि अध्यक्षता राव हरेंद्र सिंह बांदनवाड़ा ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में महेंद्र सिंह तंवर, वीरेंद्र सिंह सिंगावल एआरटीओ, कर्नल रघुवीर सिंह गोयला, कवि शक्ति सिंह जोधपुर, अभिमन्यु सिंह राजवी, सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र सिंह, राघवेंद्र सिंह, करनी सेना मेवाड़ के प्रदेश अध्यक्ष बबलू बना ठूमियां, मुकेश कंवर सथाना एवं नीरू कंवर जमोला उपस्थित रहे। मंच संचालन भगवत सिंह गोयला ने किया।
आयोजकों ने कहा कि राव चंद्रसेन जी का जीवन मातृभूमि के सम्मान, स्वतंत्रता, स्वाभिमान और अदम्य वीरता का प्रतीक रहा है। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और मातृभूमि की रक्षा के लिए जीवनभर संघर्ष किया। वहीं गढ़ बड़ली की 350वीं वर्षगांठ को पूर्वजों की गौरवशाली परंपरा और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ते हुए मनाया गया।
बड़ली राजपरिवार को दी शुभकामनाएं
समारोह में पधारे मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों, गणमान्य नागरिकों एवं समाज के प्रबुद्धजनों ने गढ़ बड़ली की 350वीं वर्षगांठ के अवसर पर बड़ली ठिकाने की बाईसा राज विनय कुमारी जी, जवाईसाहब उम्मेद सिंह जी करणसर तथा उनके पुत्र एवं पुत्रवधू को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। बड़ली राजपरिवार की ओर से सभी अतिथियों एवं मेहमानों का आभार व्यक्त किया गया।
कई ठिकानों के राजपूत सरदार हुए शामिल
समारोह में बांदनवाड़ा, भिनाय, नागोला, पीपरोली, कनेई खुर्द, एकलसिंहा, गनाहेड़ा, गोयला, बघेरा, सोलखुर्द, सोबड़ी, मसूदा, देवलियाकलां, गड्ढा नांदसी, चांपानेरी, खरवा, सावर, सरवाड़, जोताया, जेतपुरा, सिंगावल, केकड़ी, कादेड़ा, अमरगढ़, धनोप, सांगरिया, नगर, विजयनगर, गुणावटी, सथाना, गुलाबपुरा, जालियां, बिसुंदनी, पाड़लिया, बड़गांव, शाहपुरा, केरोट सहित विभिन्न ठिकानों से राजपूत सरदार एवं समाजबंधु मौजूद रहे। मसूदा, भिनाय एवं केकड़ी पंचायत समिति क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में समाजजन कार्यक्रम में पहुंचे।
समारोह के माध्यम से राव चंद्रसेन जी के शौर्य, त्याग और स्वाभिमान के साथ गढ़ बड़ली के इतिहास, संस्कृति एवं गौरवशाली विरासत को स्मरण किया गया। आयोजन ने समाज की नई पीढ़ी को अपनी ऐतिहासिक जड़ों, परंपराओं और गौरवशाली विरासत से जोड़ने का संदेश दिया।


