ऐतिहासिक गांधी बाल उद्यान के संरक्षण की मांग, व्यावसायिक निर्माण रोकने को EO को सौंपा ज्ञापन
मास्टर प्लान में ग्रीन पार्क के रूप में दर्ज भूमि पर निर्माण को लेकर उठे सवाल, जिला कलेक्टर व UDH विभाग को भी भेजी प्रतिलिपि
मालपुरा (टोंक)। मालपुरा शहर के ऐतिहासिक गांधी बाल उद्यान के संरक्षण एवं उसके मूल स्वरूप को बचाने की मांग को लेकर जागरूक नागरिकों एवं प्रबुद्धजनों ने गुरुवार को नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी रामजीत चौधरी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उद्यान परिसर में कथित रूप से शुरू किए गए व्यावसायिक निर्माण एवं आवंटन की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की गई है। ज्ञापन की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट टोंक तथा शासन सचिव, नगर विकास एवं आवासन विभाग जयपुर को भी सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
ज्ञापन में बताया गया कि गांधी बाल उद्यान मालपुरा का ऐतिहासिक एवं सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है। यह स्थान वर्षों से बच्चों के खेलकूद एवं मनोरंजन के साथ-साथ शहर की सामाजिक, सांस्कृतिक गतिविधियों और जनआंदोलनों का केंद्र रहा है। नागरिकों के अनुसार उद्यान का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय मोहनलाल सुखाड़िया द्वारा किया गया था। मौके पर मौजूद शिलालेख, बच्चों की फिसल-पट्टियां, झूले एवं फाउंटेन इसके ऐतिहासिक स्वरूप के साक्ष्य बताए गए हैं।
ज्ञापन में दावा किया गया कि स्वीकृत मास्टर प्लान के आधिकारिक विवरण एवं मानचित्र में उक्त भूमि को स्पष्ट सीमाओं के साथ विकसित पार्क एवं उद्यान के रूप में दर्ज किया गया है। वहीं टोपो-शीट में भी पूरे परिसर को हरित क्षेत्र के रूप में दर्शाए जाने की बात कही गई है। नागरिकों ने कहा कि ऐसे में भूमि के मूल स्वरूप में बदलाव से पहले संबंधित नियमों एवं वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाना आवश्यक है।
नागरिकों ने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में नगरपालिका की ओर से पर्याप्त देखरेख नहीं होने के कारण ऐतिहासिक उद्यान धीरे-धीरे बदहाल होता गया। इसके जीर्णोद्धार एवं संरक्षण को लेकर नागरिकों तथा विभिन्न संगठनों की ओर से समय-समय पर ज्ञापन दिए जाते रहे हैं। गत 5 जून को भी इस संबंध में ज्ञापन प्रस्तुत किया गया था। इसके अलावा विभिन्न समाचार पत्रों एवं मीडिया माध्यमों में उद्यान की बदहाली और संरक्षण को लेकर खबरें प्रकाशित होती रही हैं।
ज्ञापन में सबसे गंभीर आपत्ति उद्यान की भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए निर्माण शुरू किए जाने को लेकर जताई गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि भूमि मास्टर प्लान में हरित क्षेत्र के रूप में दर्ज है तो उसके उपयोग में परिवर्तन से संबंधित वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना वैधानिक भू-उपयोग परिवर्तन (LUC) के सब्जी मंडी की व्यावसायिक दुकानों का निर्माण शुरू किया जा रहा है।
नागरिकों ने नगरपालिका प्रशासन से मांग की है कि गांधी बाल उद्यान की भूमि एवं मास्टर प्लान में दर्ज उसके उपयोग की तत्काल जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार के व्यावसायिक निर्माण या आवंटन की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। साथ ही ऐतिहासिक उद्यान का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार कर इसे पुनः बच्चों और आमजन के उपयोग के लिए विकसित करने की मांग की गई है।


