देवली निकाय चुनाव: सांसद मीणा और विधायक गुर्जर की सियासी साख की परीक्षा
देवली (टोंक)।
देवली नगर पालिका चुनाव इस बार केवल वार्डों और प्रत्याशियों के बीच होने वाला चुनाव नहीं रह गया है। चुनावी मैदान में भाजपा और कांग्रेस के साथ-साथ दोनों दलों के प्रमुख स्थानीय चेहरों की राजनीतिक प्रतिष्ठा भी दांव पर है। एक ओर कांग्रेस सांसद हरिश्चंद्र मीणा के सामने देवली में कांग्रेस संगठन को मजबूती देने और बेहतर प्रदर्शन की चुनौती है, वहीं भाजपा विधायक राजेंद्र गुर्जर के सामने नगर पालिका में पार्टी का बोर्ड बनाने का लक्ष्य है।
नगर निकाय चुनाव की घोषणा और आचार संहिता लागू होने के साथ ही दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मंगलवार को भाजपा ने देवली में निकाय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित कर चुनावी तैयारियों, संगठन की रणनीति और टिकट चयन को लेकर मंथन किया। वहीं कांग्रेस ने भी गुरुवार को देवली में कार्यकर्ता बैठक आयोजित करने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस की बैठक में सांसद हरिश्चंद्र मीणा कार्यकर्ताओं और पार्षद पद के आवेदकों से संवाद करेंगे। इससे पहले भी सांसद कांग्रेस कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा कर चुके हैं।
भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में विधायक राजेंद्र गुर्जर ने देवली नगर पालिका में भाजपा का बोर्ड बनने का दावा किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सभी 35 वार्डों में एकजुट होकर चुनाव लड़ने और पार्टी प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने का आह्वान किया। विधायक ने हाल ही में हुए उपचुनाव में 5 हजार से अधिक मतों से मिली जीत का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं से उसी उत्साह और एकजुटता के साथ निकाय चुनाव में उतरने की अपील की।
भाजपा का दावा है कि विधायक राजेंद्र गुर्जर के नेतृत्व और राज्य की ट्रिपल इंजन सरकार के विकास कार्यों के आधार पर पार्टी नगर पालिका में अपना बोर्ड बनाने में सफल होगी। ऐसे में यदि भाजपा अपेक्षित प्रदर्शन करती है तो इसे विधायक गुर्जर की स्थानीय राजनीतिक पकड़ और संगठन पर मजबूत पकड़ के तौर पर देखा जाएगा। वहीं परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने पर विपक्ष को विधायक की रणनीति और राजनीतिक पकड़ पर सवाल उठाने का मौका मिल सकता है।
दूसरी ओर कांग्रेस के लिए भी देवली नगर पालिका चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। सांसद हरिश्चंद्र मीणा का स्वयं देवली पहुंचकर कार्यकर्ताओं और पार्षद पद के आवेदकों से संवाद करना इस बात का संकेत है कि पार्टी चुनाव को गंभीरता से ले रही है। कांग्रेस के सामने मजबूत उम्मीदवारों का चयन करने, वार्ड स्तर पर संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की चुनौती है।
सांसद हरिश्चंद्र मीणा की लोकसभा क्षेत्र में राजनीतिक सक्रियता और कांग्रेस संगठन की स्थिति का असर भी निकाय चुनाव के परिणामों में दिखाई दे सकता है। यदि कांग्रेस भाजपा को कड़ी चुनौती देती है या नगर पालिका में बेहतर स्थिति बनाने में सफल रहती है तो इसे सांसद की राजनीतिक सक्रियता और संगठनात्मक प्रभाव के रूप में देखा जाएगा। वहीं कमजोर प्रदर्शन होने पर विपक्ष सांसद की भूमिका और कांग्रेस संगठन की रणनीति पर सवाल उठा सकता है।
देवली नगर पालिका के पिछले राजनीतिक समीकरण भी इस चुनाव को रोचक बनाते हैं। वर्तमान बोर्ड पहले कांग्रेस के पास था, जो बाद में राजनीतिक बदलाव के चलते भाजपा के नियंत्रण में आ गया। ऐसे में दोनों दलों के लिए नगर पालिका पर पकड़ मजबूत करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
इधर भाजपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में 35 वार्डों के लिए करीब 175 आवेदन आने से टिकट की दावेदारी को लेकर पार्टी के भीतर हलचल बढ़ गई है। कांग्रेस में भी कार्यकर्ता बैठक के बाद संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। कांग्रेस की ओर से पार्षद पद के आवेदन ऑनलाइन भी लिए जा रहे हैं।
दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट वितरण के दौरान असंतोष को नियंत्रित करने की होगी। दावेदारों की बड़ी संख्या के बीच पार्टी नेतृत्व को सभी गुटों, वरिष्ठ नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बनाकर संगठन को एकजुट रखना होगा। टिकट से वंचित दावेदार चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
कुल मिलाकर देवली नगर पालिका चुनाव में मुकाबला सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच नहीं होगा, बल्कि इसके परिणाम दोनों प्रमुख दलों के स्थानीय नेतृत्व की राजनीतिक पकड़ का भी संकेत देंगे। चुनाव यह तय करेगा कि देवली में किस दल का संगठन अधिक मजबूत साबित होता है और जनता के बीच किस नेता का प्रभाव अधिक असरदार है।
यही वजह है कि इस बार देवली का निकाय चुनाव एक बड़ा सियासी सवाल लेकर सामने आया है—क्या नगर पालिका की सत्ता की लड़ाई इस बार सांसद हरिश्चंद्र मीणा और विधायक राजेंद्र गुर्जर की राजनीतिक पकड़ के बीच प्रतिष्ठा की सीधी परीक्षा बनेगी?


