झालरा सरोवर के अतिक्रमण और गंदे पानी की आवक पर उठी आवाज
वरिष्ठ नागरिक मंच ने ईओ को सौंपा अभ्यावेदन, पाल का सीमांकन कर अतिक्रमण हटाने और नालियों का प्रवाह रोकने की मांग
मालपुरा (टोंक)। शहर के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले झालरा सरोवर के संरक्षण को लेकर वरिष्ठ नागरिक मंच ने बुधवार को नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी को अभ्यावेदन सौंपा। इसमें सरोवर की पाल एवं जलभराव क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने, गंदे पानी की नालियों का प्रवेश रोकने तथा सरोवर के सौन्दर्यीकरण और संरक्षण की मांग की गई।

अभ्यावेदन में कहा गया कि झालरा सरोवर मालपुरा की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण जलस्रोत है। जलझूलनी एकादशी के अवसर पर नगर के विभिन्न मंदिरों से ठाकुरजी के डोले यहां जलविहार के लिए आते हैं। ऐसे में सरोवर में गंदे नालों का पानी पहुंचना चिंता का विषय है।
मंच ने सरोवर के तट स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े इस जलस्रोत को गंदे पानी की आवक से मुक्त रखना आवश्यक है। अभ्यावेदन में नगरपालिका चुनाव के संकल्प-पत्र के ‘नवनिर्माण रोड मैप 2026’ में झालरा तालाब का अतिक्रमण हटाकर सौन्दर्यीकरण करने के किए गए संकल्प को भी लागू करने की मांग की गई।
मंच ने सरोवर की पूरी पाल का सीमांकन एवं सर्वे, अतिक्रमणों की पहचान कर हटाने, गंदे पानी की नालियों को चिन्हित कर उनका प्रवाह रोकने तथा स्थायी जलनिकासी व्यवस्था विकसित करने की मांग की। साथ ही जल की नियमित सफाई व गुणवत्ता जांच, पाल-घाट की स्वच्छता, हरित क्षेत्र एवं प्रकाश व्यवस्था विकसित करने और धार्मिक आयोजनों को ध्यान में रखते हुए स्थायी संरक्षण व्यवस्था करने की मांग रखी।
इस दौरान अधिशासी अधिकारी ने मंच के सदस्यों को आश्वस्त किया कि नगरपालिका बोर्ड की आगामी बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव रखा जाएगा तथा शीघ्र आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
अभ्यावेदन के दौरान मंच के सदस्य चम्पालाल जैन, रामगोपाल कनोजिया, आर.एल. दीपक, चन्द्र मोहन उपाध्याय, अर्जुन लाल जैन, दिनेश कान्त पाण्डेय, बालकिशन शर्मा, आर.जे. खींची एवं डॉ. राजकुमार गुप्ता उपस्थित रहे।
वरिष्ठ नागरिक मंच ने कहा कि झालरा सरोवर का संरक्षण केवल तालाब बचाने का विषय नहीं, बल्कि मालपुरा की ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक आस्था और पर्यावरण की रक्षा से जुड़ा मामला है।


