डिग्गी में कृषि भूमि पर कथित प्लॉटिंग का खेल!
रेरा नियमों की कसौटी पर कॉलोनियां, सूत्रों के दावों से उठे सवाल
डिग्गी/मालपुरा (टोंक)। धर्मनगरी डिग्गी कस्बे के आसपास कृषि भूमि पर कॉलोनियां विकसित कर भूखंड काटे जाने की चर्चाओं ने नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, कस्बे के आसपास कई स्थानों पर कृषि भूमि का आवासीय उपयोग किए जाने तथा बिना आवश्यक स्वीकृतियों के भूखंड काटकर बेचे जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
सूत्रों का कहना है कि कुछ कॉलोनियों में भूमि उपयोग परिवर्तन, ले-आउट स्वीकृति, विकास अनुमति और रेरा पंजीयन से संबंधित स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में संबंधित विभाग के अभिलेखों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल पर रेरा पंजीयन का प्रावधान
राजस्थान रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण के प्रावधानों के अनुसार, सामान्यतः 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल में विकसित की जाने वाली परियोजना या 8 से अधिक आवासीय इकाइयों वाली परियोजना के लिए पंजीयन आवश्यक हो सकता है। परियोजना की प्रकृति और लागू छूट के आधार पर स्थिति अलग हो सकती है।
पंजीयन के बिना रेरा के दायरे में आने वाली परियोजना का विज्ञापन, प्रचार, बुकिंग अथवा बिक्री करना नियमों के विपरीत हो सकता है। यही कारण है कि डिग्गी क्षेत्र में विकसित हो रही कॉलोनियों की वास्तविक स्थिति की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
सिर्फ रेरा पंजीयन ही पर्याप्त नहीं
जानकारों के अनुसार किसी कॉलोनी का रेरा पंजीयन होना ही उसकी संपूर्ण वैधता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। कृषि भूमि को आवासीय अथवा अन्य गैर-कृषि उपयोग में लेने के लिए लागू भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया, सक्षम प्राधिकारी से ले-आउट स्वीकृति, विकास संबंधी अनुमति तथा स्थानीय निकाय के नियमों की पालना भी आवश्यक हो सकती है।
वहीं भूखंडीय विकास वाली परियोजनाओं में सड़क, जल निकासी, पेयजल, विद्युत व्यवस्था तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं से संबंधित स्वीकृतियों और व्यवस्थाओं की स्थिति भी जांच के दायरे में आती है।
सूत्रों के दावे सही हैं तो कौन देगा जवाब?
सूत्रों के अनुसार कुछ स्थानों पर मूलभूत सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था किए बिना ही भूखंडों की खरीद-बिक्री की चर्चाएं हैं। यदि ये शिकायतें जांच में सही पाई जाती हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि संबंधित विभागों ने अब तक ऐसी कॉलोनियों का निरीक्षण क्यों नहीं किया और नियमों की पालना सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई की गई?
स्थानीय लोगों ने डिग्गी क्षेत्र में विकसित सभी कॉलोनियों की भूमि उपयोग स्थिति, स्वीकृत ले-आउट, विकास अनुमति, रेरा पंजीयन तथा अन्य आवश्यक स्वीकृतियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
रिकॉर्ड सामने आने पर साफ होगी तस्वीर
इस संबंध में समाचार का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित से जुड़े मामले में संबंधित अभिलेखों और नियमों की स्थिति पर सवाल उठाना है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर सामने आई शिकायतों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि डिग्गी क्षेत्र में विकसित कॉलोनियां नियमों के अनुरूप हैं अथवा नहीं।
अब देखना यह है कि नगर पालिका और संबंधित विभाग इन शिकायतों पर क्या जांच करते हैं और जांच के बाद कितनी कॉलोनियां नियमों के अनुरूप अथवा नियमों के विपरीत पाई जाती हैं।


