गांधीनगर कॉलोनी सवालों के घेरे में, करीब 10 लाख की निविदा के बाद उठे कई सवाल!
कागजों में 90-100 प्लाटों की कहानी, मौके पर नजर आती है दूसरी तस्वीर—आखिर कहां है गांधीनगर?
मालपुरा (टोंक)। केकड़ी रोड स्थित गांधीनगर कॉलोनी एक बार फिर चर्चा में है। इस बार चर्चा का कारण नगर पालिका मालपुरा की ओर से 12 अगस्त 2026 को जारी करीब 10 लाख रुपए की मिट्टी भराई एवं ग्रेवल निर्माण संबंधी निविदा बताई जा रही है। निविदा सामने आने के बाद अब इस क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और पुराने आवंटनों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, वर्ष 1990 के दशक के आसपास नगर पालिका की ओर से यहां कॉलोनी विकसित कर लॉटरी के माध्यम से करीब 90 से 100 प्लाटों का आवंटन किया गया था। बताया जाता है कि उस समय प्लाट अलग-अलग आकार के थे। सूत्रों के अनुसार वर्तमान में मूल आवंटी यहां निवास नहीं करते और कई प्लाटों का बाद में अन्यत्र स्थानांतरण होने की बात सामने आती है।
वहीं क्षेत्र के बुजुर्गों की मानें तो यहां कभी व्यवस्थित कॉलोनी विकसित होने की स्थिति दिखाई ही नहीं दी। उनका कहना है कि इस स्थान पर पहले बड़े-बड़े गड्ढे थे और आसपास के लोग अपने कच्चे मकानों के लिए यहां से मिट्टी तक ले जाते थे।
एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से कंजर समाज के परिवारों के निवास की बात स्थानीय लोग बताते हैं। वर्तमान में यहां कच्ची बस्ती मौजूद है, जिसे आमजन मीर कॉलोनी के नाम से जानते हैं और यह क्षेत्र वर्तमान में नगर पालिका के वार्ड संख्या 4 में आता है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—यदि गांधीनगर में दशकों पहले प्लाट आवंटित किए गए थे, तो आज मौके पर उन आवंटित भूखंडों की वास्तविक स्थिति क्या है? कितने आवंटी मौके पर हैं? कितने भूखंडों का हस्तांतरण हुआ? और करीब 10 लाख रुपए की मिट्टी भराई व ग्रेवल निर्माण की निविदा किस वास्तविक आवश्यकता और स्थल विकास के आधार पर जारी की गई?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब नगर पालिका के अभिलेखों और मौके की वास्तविक स्थिति के मिलान से ही सामने आ सकता है। अब देखना होगा कि नगर पालिका पुराने आवंटन, वर्तमान कब्जे और प्रस्तावित निर्माण कार्य को लेकर क्या स्थिति स्पष्ट करती है।
नोट: उपरोक्त पुराने प्लाट आवंटन, प्लाटों की वर्तमान स्थिति, हस्तांतरण तथा मौके की स्थिति से संबंधित जानकारी स्थानीय लोगों एवं सूत्रों से प्राप्त हुई है। इन तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। नगर पालिका के अभिलेख एवं संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।


